क्या है सोने की हॉलमार्किंग ? हॉलमार्किंग के बारे में सब कुछ जाने।

क्या है सोने की हॉलमार्किंग?

आम शब्दों में कहें तो गोल्ड ज्वैलरी पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अपने मार्क के द्वारा शुद्धता की गारंटी देता है।

क्या है सोने की हॉलमार्किंग ? हॉलमार्किंग के बारे में सब कुछ जाने।

हॉलमार्क एक तरह की गारंटी है। इसके तहत हर गोल्ड ज्वैलरी पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अपने मार्क के द्वारा शुद्धता की गारंटी देता है। यदि आसान भाषा में कहें तो यह विश्वसनीयता प्रदान करने का एक माध्यम है। यदि गहनों पर हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है। बीआईएस का चिह्न प्रमाणित करता है कि गहना भारतीय मानक ब्यूरो के स्टैंडर्ड पर खरा उतरता है।

भारत में हॉलमार्किंग के लिए कौन सी धातु आवश्यक है?

सरकार ने 14 जून, 2018 को जारी एक अधिसूचना के माध्यम से दो श्रेणियों को अधिसूचित किया- सोने के आभूषण और सोने की कलाकृतियां; और चांदी के आभूषण और चांदी की कलाकृतियां- हॉलमार्किंग के दायरे में। इसलिए, भारत में हॉलमार्किंग केवल दो धातुओं-सोना और चांदी के आभूषणों के लिए उपलब्ध है।

हालांकि, एक निश्चित श्रेणी के आभूषणों और वस्तुओं को हॉलमार्किंग की अनिवार्य आवश्यकता से छूट दी जाएगी।

क्या सभी जौहरी हॉलमार्किंग के दायरे में आते हैं?

नहीं। 40 लाख रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले ज्वैलर्स को अनिवार्य हॉलमार्किंग से छूट दी जाएगी।

हॉलमार्किंग योजना के तहत सोने और चांदी के लिए शुद्धता मानक क्या हैं?

बीआईएस मानकों के अनुसार, सोने की शुद्धता के आधार पर हॉलमार्किंग की तीन श्रेणियां हैं- 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट। हालांकि, मंत्रालय ने 15 जून को घोषणा की थी कि हॉलमार्किंग के लिए अतिरिक्त 20, 23 और 24 कैरेट के सोने की भी अनुमति होगी।

हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की क्या जरूरत थी?

भारत सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। हालांकि, देश में हॉलमार्क वाली ज्वैलरी का स्तर बहुत कम है। मिनिस्ट्री के मुताबिक, फिलहाल सिर्फ 30 पर्सेंट इंडियन गोल्ड ज्वैलरी पर हॉलमार्क है।

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